लेखनी कहानी -17-Jan-2023
पंख पसार छू लेने दो आसमान
एक सपना है मेरा
छू लू मे आसमान
पंख लगाकर
उडू गगन मे
गगन मे उडकर
जा ऊ मे दूर
भ्रमण मे
काश होते मुझे
पंख तो उड जाती मे
मन के भवन मे
मन कहता चल अब
तू गगन मे
उडती मे पंचियो को
झुंड मे
आंख खुली तो देखा
वो सपना था
वो केवल मन का
अपना था
स्वरचित एवं मौलिक रचना
-अभिलाषा देशपांडे
Babita patel
20-Jan-2023 03:27 PM
nice
Reply
Babita patel
20-Jan-2023 03:26 PM
beautiful
Reply
Swati chourasia
18-Jan-2023 12:12 PM
बहुत खूब
Reply